बस लोग हमारी ख़ामोशी को सुन नहीं पाते।
हम भी परिंदों की तरह उसकी एक झलक के भिखारी बन गए,
जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम…!!
क्योंकि रोने पर कोई आंसू पोंछने वाला नहीं आता।
क्योंकि दुनिया रोते हुए चेहरे पर ताने देती है।
चाहकर भी उनसे नाता तोड़ा नहीं जा सकता।
क्योंकि भीड़ में भी मेरे अपने नहीं थे।
मुझे कौनसा इस दुनिया में दुबारा आना है ..!!
की आदमी ही आदमी को जाल में फसाने लगा है…!
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एक चादर में लिपटे दो बदन.. एक तेरा हो, एक मेरा हो।
फिर सोचा मैंने उन्हें तड़पाके दर्द मुझको ही होगा,
अक्सर मेरा ख्याल तुम्हें भी सताता होगा
कब तक तेरे इश्क़ का बोझ Sad Shayari in Hindi उठा कर रोता रहूँ,